कहानी के आगे की कहानी
कहानी कछुए और खरगोश की
आप सभी ने कक्षा दो की कछुए और खरगोश की कहानी तो सुनी ही होगी । लेकिन आपको यह पता नहीं होगा कि उनके बीच एक बार नहीं बल्कि चार बार दौड़ हुई थी । तो आइए आज मैं आपको पूरी कहानी बिस्तार से बताता हूं!
पहली कहानी
एक समय की बात है कि एक जंगल मे खरगोश और कछुआ रहते थे! दोनों में बहुत ही घनिष्ठ मित्रता थी! दोनों एक ही साथ रहते थे!
दोनों में बहस हो हो गया कि कौन तेज दौड़ सकता है! शर्त लग गई की नदी पर कौन पहले पहुँचेगा! एक साथ दोनों दौड़ना शुरु किये!
दोनों में बहस हो हो गया कि कौन तेज दौड़ सकता है! शर्त लग गई की नदी पर कौन पहले पहुँचेगा! एक साथ दोनों दौड़ना शुरु किये!
खरगोश तो तेज दौड़ता ही है। वह तेज दौड़ते दौड़ते बहुत दुर निकल गया । वह पिछे मुड़ कर देखा तो कछुआ बहुत पिछे था!
खरगोश ने सोचा कि क्यो न थोड़ा आराम कर लिया जाए! वह एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा! इतने में उसे नींद आ गया और वह सो गया
कछुआ निरंतर चलता रहा! चलते चलते वह नदी पर पहुँच गया!
जब खरगोश की नींद खुली तो देखा कि कछुआ नदी पर पहुँच गया है! खरगोश को अपने किये पर बहुत ही पछतावा हो रहा था!-
शिक्षा- दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने ऊपर घमंड नहीं करना चाहिए! हमारी जिंदगी में जीत इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम कितने तेजी में काम को करते हैं! बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि उस रफ्तार को अपनी जीत तक कायम रख पाते हैं कि नहीं!
दोस्तों कहानी अभी खत्म नहीं हुई है! खरगोश ने हार नहीं मानी है! उसने कछुआ से फिर से शर्त लगाई और इस बार दोनों एक साथ दौड़ना शुरु किए!
दुसरी कहानी
कछुआ तो धीरे-धीरे चलता ही है! लेकिन खरगोश इस बार बिना कही रुके निरंतर चलता रहा! और इस तरह खरगोश ने यह रेस जीत लिया!-
शिक्षा- इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि न रुकना है ! न दौड़ना है! बस चलते रहना है, जब तक कि मंजिल न मिल जाए!
खरगोश ने यह रेस जीत लिया लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है! कछुआ ने फिर से शर्त लगाई लेकिन इस बार रास्ता बदला गया!
तीसरा कहानी
दोनों ने रेस के लिए दौड़ लगाई लेकिन रास्ते में नदी पड़ गया! अब खरगोश तो नदी पार कर नहीं सकता था! तो खरगोश नदी पर बैठकर सोचने लगा कि अब क्या किया जाए? खरगोश सोचता रहा कि अब क्या करूँ ?
लेकिन कछुआ धीरे-धीरे चलता रहा और चलते-चलते नदी पर पहुँचा! नदी में उतर कर उसने नदी भी पार कर ली और इस तरह कछुए ने यह रेस जीत लिया!
शिक्षा – इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें जिंदगी में छोटी– छोटी परेशानियों से न घबराते हुए अपने मंजिल की ओर ध्यान देना चाहिए! साथ ही सब लोग सभी क्षेत्रों के कार्य नहीं कर सकता है! सबका आपने क्षमता और रुचि के अनुसार अपने क्षेत्र का चयन करना चाहिए!
कछुआ रेस तो जीत लिया लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई! खरगोश हार कहा मानने वाला था!
चौथी कहानी
उसने फिर से कछुए से रेस के लिए शर्त लगाई , लेकिन इस बार दोनों एक साथ दौड़ने का फैसला किये! कुछ दुर कछुआ , खरगोश को अपने उपर बैठाकर ले जाता तो कुछ दुर खरगोश , कछुए को अपने उपर बैठाकर ले जता!
इस तरह चलते हुए जब रास्ते में नदी आया तो कछुए ने खरगोश को अपने उपर बैठाकर नदी पार कर लिया और इस तरह दोनों मिलकर अपने मंजिल तक पहुँच गए!
इस बार दोनों को जो सुख , शांति मिला वह कभी नहीं मिला! इस बार दोनों ने अपने-अपने अहमियत को जाना व पहचाना!
#शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि काम कितना भी कठिन क्यो न हो लेकिन उसे मिलजुल कर आसान बनाया जा सकता है!और हमरी राष्ट्र भी यही कहती है! सबका साथ सबका विकास! सर्वजन हिताय बहुजन सुखाया!
ये मेरी अपनी ब्लॉग पर पहली पोस्ट है! अगर आप ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो अन्य दोस्तों के साथ शेयर करें! अगर कोई सुझाव हो तो जरूर हमें कमेंट करके बताएं!
--- रितेश कुमार✍️✍️
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