आम्बेडकर ने आरक्षण विरोधियों के लिए क्या किए? - कंटाप कहानी

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मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

आम्बेडकर ने आरक्षण विरोधियों के लिए क्या किए?

आम्बेडकर ने आरक्षण विरोधियों के  क्या किए?


एक बहुत बड़ा तबका है जिन्हें लगता है! आम्बेडकर ने तो सिर्फ दलितों के समानता की ही लड़ाई लड़ी! दलितों के लिए आरक्षण का प्रावधान करवाया! हमारे लिए क्या किया???

पूरे देश में इस लॉकडॉन को ध्यान रखते हुए! सभी अपने अपने घरों में संविधान निर्माता डॉभीमराव अम्बेडकर की 129वीं जयंती मना रहे हैं

परिचय

भारत के संविधान निर्माता, चिंतक और समाज सुधारक डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई रामजी सकपाल था। वे अपने माता-पिता की 14वीं और अंतिम संतान थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों जैसे- छुआछूत और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष में लगा दिया। इस दौरान बाबा साहेब गरीब, दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे। जितना आम्बेडकर के अंदर समाजिक चेतना है उससे कहा ज्यादा आर्थिक चेतना है! ये आम्बेडकर के विचारों प्रचार प्रसार करने वाले ने गलती करी है! समाज के समाने सिर्फ उनके समजिक उत्थान में गए कार्यों को सामने रखा! देश के आर्थिक उत्थान में भी आम्बेडकर साहब का बहुत बड़ा योगदान रहा! 

आधुनिक भारत के निर्माण में आम्बेडकर के योगदान:-

आरबीआई के स्थापना में योगदान

The problem of the rupee नामक अपनी रचना में डॉ. अम्बेडकर ने 1800 से 1893 के दौरान, विनिमय के माध्यम के रूप में भारतीय मुद्रा (रुपये) के विकास का परीक्षण किया! जो बाद में RBI के स्थापना का आधार बना! आरक्षण विरोधियों क्या यह आरबीआई सिर्फ दलितों के काम आता है??

श्रमिक और कामगर मजदूरों के अधिकार में योगदान

बाबा साहेब सिर्फ अछूतों, महिलाओं के अधिकार के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के पुनर्निर्माण के लिए भी प्रयासरत रहे। उन्होंने मजदूर वर्ग के कल्याण के लिए उल्लेऽनीय कार्य किये। पहले मजदूरों से प्रतिदिन 12-14 घंटों तक काम लिया जाता था। इनके प्रयासों से प्रतिदिन आठ घंटे काम करने का नियम पारित हुआ। कामगर मजदूर चाहें ओ ऑफिस में काम करता है या दिहाड़ी मजदूर है! इसमें सभी लोग हैं! मुस्लिम, स्वर्ण, पिछड़े, दलित, आदिवासी, महिला सभी है!

इसके अलावा उनके प्रयासों से मजदूरों के लिए इंडियन ट्रेड यूनियन अधिनियम, औधोगिक विवाद अधिनियम तथा मुआवजा आदि से भी सुधार हुए। उल्लेखनीय है कि उन्होंने मजदूरों को राजनीति में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान के लगभग ज्यादातर श्रम कानून बाबा साहेब के ही बनाए हुए हैं, जो उनके विचारो को जीवंतता प्रदान करते हैं।

महिलाओं के विकास में योगदान

आज भारतीय समाज में स्त्रियों की हीन दशा को लेकर काफी चिंतित थे। उनका मानना था कि स्त्रियों के सम्मानपूर्वक तथा स्वतंत्र जीवन के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। अम्बेडकर ने हमेशा स्त्री-पुरुष समानता का व्यापक समर्थन किया। यही कारण है कि उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री रहते हुए हिंदू कोड बिल संसद में प्रस्तुत किया और हिन्दू स्त्रियों के लिए न्याय सम्मत व्यवस्था बनाने के लिए इस विधेयक में उन्होंने व्यापक प्रावधान रखे। उल्लेखनीय है कि संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने पर उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता बात कही गई थी। जिसमें महिलाओं के लिए  समान काम का समान वेतन, गर्भावस्था के दौरान छुट्टी, मासिक धर्म के लिए छुट्टी भी है! 
भारत के सभी महिलाएं को बाबा साहेब के प्रति ऋणी होना चाहिए!

 राजनीतिक क्षेत्रः डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारत के आधुनिक निर्माताओं में से एक माने जाते हैं। उनके विचार व सिद्धांत भारतीय राजनीति के लिए हमेशा से प्रासंगिक रहे हैं। दरअसल वे एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के हिमायती थे, जिसमें राज्य सभी को समान राजनीतिक अवसर दे तथा धर्म, जाति, रंग तथा लिंग आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए। उनका यह राजनीतिक दर्शन व्यक्ति और समाज के परस्पर संबंधों पर बल देता है।
उनका यह दृढ़ विश्वास था कि जब तक आर्थिक और सामाजिक विषमता समाप्त नहीं होगी, तब तक जनतंत्र की स्थापना अपने वास्तविक स्वरूप को ग्रहण नहीं कर सकेगी। दरअसल सामाजिक चेतना के अभाव में जनतंत्र आत्मविहीन हो जाता है। ऐसे में जब तक सामाजिक जनतंत्र स्थापित नहीं होता है, तब तक सामाजिक चेतना का विकास भी संभव नहीं हो पाता है।

आरक्षण विरोधियों तुम्हारे अंदर सिर्फ इस बात की पीड़ा है! कि जाति के आधार पर आरक्षण का प्रावधान क्यों किया गया?? और इसी बात को लेकर तुम्हारे अंदर आम्बेडकर के खिलाफ नफ़रत भरा जाता है! और इन सब के बीच तुम आम्बेडकर के राष्ट्र निर्माण में सारे योगदान भुल जाते हो!

और हां जाति के आधार पर आरक्षण इसलिए किया गया! क्योंकि हमारा समाज जाति आधारित है! हमारे समाज में जाति के आधार पर शोषण होता है!


-- रितेश कुमार ✍️✍️

1 टिप्पणी:

  1. Ye khna sahi nhi hoga ki vo aarkshan se sahmat se khub dr. Bhim Rao Ambedkar aarkshan ke khilaf the Lekin us samay halat ko dekhte huye unhone kuchh varsho ke liye aarkshan ka prvadhan kye the

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