भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केन्द्र सरकार #आत्मनिर्भर_भारत_योजना के तहत 20 लाख करोड़ खर्च करेगी! जो देश के कुल जीडीपी का 10% होगा! जो देश के अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों (व्यवसाय, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि आदि) में खर्च होगा! मोदी जी अपने 35 मिनट संबोधन के दौरान उन्होंने एक स्लोगन का इस्तेमाल किए! जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है! #लोकल_के_लिए_वोकल यथार्थ देशी वस्तुओं को इस्तेमाल करें, उस पर गर्व करे, और उसका प्रचार करें! यानी देशी वस्तुओं को लोकल से ग्लोबल बनाने में मदद करें!
अब आप सोच रहे होंगे! इ सब तो ठीक है पर जो फोटो साथ में लगाएं है! उसका इस आत्मनिर्भर और देशी वस्तुओं से का मतलब है?? हम कहेंगे मतलब है!
अब आते हैं असल मुद्दे पर...
जब बचपन में इस तरह के सवाल पुछे जाते थे! तो उसका उत्तर हमलोग उसी रेखा के सामने एक बड़ी रेखा खींच देते थे! फिर उस पूर्ववती रेखा को छोटा सिद्ध कर देते थे!
भारतीय आम जन को हमेशा इस बात के लिए जोर डाला जाता है! वह देशी वस्तुएं खरीदे और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करे!
ग्राहक का प्राकृत स्वभाव होता है उसे कम पैसों में अच्छी वस्तु चाहिए! इस स्वभाव की पूर्ति विदेशी कंपनियां अच्छे से कर देते हैं! इसलिए लोग चाइनीज वस्तुओं की तरफ आकर्षित होते हैं! फिर चाहे चाइनीज फोन या या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सभी सस्तो दामों पर उपलब्ध है! वही देशी वस्तुओं की बात करें तो क्वालिटी अच्छी होगी पर महंगा अधिक होगी! फिर चाहे खादी के कपड़े हो या जुट के बैग मंहगा तो होगा!
तो कहने का मतलब है! चाइना ने या अन्य विकसित देशों ने ग्लोबल व्यापार के क्षेत्र में जो रेखा खींच है! उससे बड़ी एक रेखा भारत को खिंचाने की जरूरत है! जिससे भारत के लोगों को कम पैसों में अच्छी गुणवत्ता वाली देशी वस्तुएं मिलें! भारतीय स्वभावीक रुप से देशी वस्तुओं का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे! औ भारत खुद ब खुद आत्मनिर्भर हो जाएगा!
भारत को इस लम्बी रेखा खींचने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विस्तार करना होगा! हमें अपनी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारना होगा! हमें कामचोरी और भ्रष्टाचारी से उपर उठना होगा! और बहुत कुछ करने की जरूरत है... जितना आप सोच सकते हैं...
--- रितेश कुमार

Is sanrakshanbad ke daur me jha job gdp growth jaise samsya hai is sandarv me dedi vastuyo ko pramote krna atiaabshayak apitu sanrakshanbad ek achchhi vichardhara nhi hai
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