एक थी मनीषा - कंटाप कहानी

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बुधवार, 30 सितंबर 2020

एक थी मनीषा

 एक थी मनीषा


उत्तर प्रदेश के हाथरस में दरिंदों ने रेप किया, जुबां काट दी, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी.

15 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझती रही.

उस वक्त पुलिस ने 8 दिन तक रेप की धारा तक नही लगाई. जो मनीषा के लिए आवाज़ उठा रहे थे पुलिस उसे ही फ़र्जी खबर वायरल करने के नाम पर गिरफ्तार कर रही थी.


बलात्कारी आरोपियों को बचाने के लिए "सवर्ण परिषद" के पदाधिकारियों ने जिले के एसपी से मिलकर ज्ञापन दिया की झूठा फंसाया जा रहा है.


बेहाल सिस्टम के कारण मनीषा जिंदगी से जंग हार गई
परिजन मनीषा की अंतिम संस्कार के लिए अपनी बेटी का शव मांगते रह गए कि वो हिन्दू रीतिरिवाजों के अनुसार हल्दी लगाकर विदाई करेंगें.लेकिन किसी ने नही सुनी. क्योकि इस घटना को दबाना था और बलात्कारियों को बचाना था.


उसके बाद पुलिस ने मनीषा का शव रात्रि के 2:30-3:00 बजे जला दिया. सबूत मिटा दिया.


फ़र्जी रिपोर्ट, फ़र्जी खबर चलाकर चिन्मयानंद की तरह इसको भी बचा लेंगें


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